खुदनेश्वर धाम मोरवा, एक ऐसा मंदिर जिसमें मजार भी है।

खुदनेश्वर धाम/स्थान मोरवा

Khudneshwar Dham/Sthan Morwa

सावन का महीना जब भी आता है तो हर तरफ बाबा भोलेनाथ की भक्ति में भक्त झूमने लगते हैं। चारो तरफ बोलबम की गूंजे सुनाई देने लगती है। सभी भक्तों बाबा भोलेनाथ के मंदिर में कांवर लेकर जाते है और बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित करते है। 

आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहां शिवलिंग के साथ साथ मजार की भी पूजा अर्चना की जाती है। 

यह मंदिर "खुदनेश्वर धाम मोरवा" के नाम से जाना जाता है। "खुदनेश्वर धाम मोरवा" बिहार के समस्तीपुर जिले में मुसरीघरारी और ताजपुर के बीच गंगापुर चौक के पास मोरवा नामक जगह पर स्थित है। 

बाबा खुदनेश्वर धाम मंदिर में सावन के महीने में भक्तो की काफी भीड़ होती है। बहुत सारे भक्तों नजदीकी गंगा नदी से जल लेकर पैदल बाबा खुदनेश्वर धाम के मंदिर पहुंचते है और सुबह सुबह सूर्योदय से पहले बाबा भोलेनाथ को गंगाजल अर्पित करते है। सावन खत्म होने के बाद भी यहां प्रत्येक रविवार को लोगो की भीड़ बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए लगी होती हैं। ऐसा माना जाता है की जो भी सच्चे मन से बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित करते है, उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।

मंदिर के स्थापना से जुड़े तथ्य-

बाबा खुदनेश्वर धाम मंदिर केवल लोगो के आस्था का प्रतीक नहीं है बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द का भी प्रतीक है। बाबा खुदनेश्वर धाम मंदिर की खास बात यह है की यहां बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग के बगल में एक ही छत के नीचे एक मुस्लिम महिला खुदानी बीबी की मजार भी स्थापित है।

स्थानीय लोगो द्वारा बताया जाता है की हिंदू मुस्लिम के एकता का प्रतीक बाबा खुदनेश्वर धाम के मंदिर का निर्माण 1858 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। हालाकि कुछ लोगो का कहना है की यह घटना 13वीं सदी की है और 1858 में ब्रिटिश काल के दौरान इस जगह को मंदिर का रूप दिया गया था। उस समय वहां घना जंगल था आस पास में किसी का घर नहीं था यहां कुछ लोगो के साथ साथ खुदनी बीबी भी गाय चराने आया करती थी। सभी गाय को चरने छोर देते थे और खेलने लगते थे। इस बीच खुदनी बीबी की गाय एक खास जगह पर गाय अपने आप दूध देने लगती थी इस बात का पता खुदनी बीबी को नहीं चल पाता था लेकिन जब वह शाम को अपने घर लौटती थी तब उसके घरवालों द्वारा उसे खूब डाट पड़ती थी। खुदनी बीबी के घरवाले जानना चाहते थे की गाय का दूध कहां चला जाता है लेकिन, खुदनी बीबी के पास इसका जवाब नहीं होता था। अगली रात खुदनी बीबी के सपने में स्वम महाकाल प्रकट होते है और कहते है की यह बात किसी से मत बताना की गाय दूध कहां पर गिरा ती है। अगर यह बात किसी से कहेगी तब दो दिनों में तुम्हारी मृत्यु हो जायेगी। इसके बाद खुदनी बीबी की नींद खुल जाती है। फिर से अपने घर का काम करने के बाद वह गाय को लेकर चराने चली जाती है। यह घटनाक्रम कई दिनों तक चलता है और हर रोज खुदानी बीबी डाट सुनती है। वह स्वप्न वाली बात खुदनी बीबी के मन में बार बार आते रहता है। तब खुदानी बीबी उस स्वप्न वाली बात को अपने घरवाले को बता देती है। घरवाले को उसकी बात पर यकीन नही होता है तब एक दिन घरवाले यह निश्चित करते है की आज वह खुद खुदनी बीबी के पीछे पीछे जायेंगे और देखेंगे की गाय का दूध कौन निकलता है। जब घरवाले उनका पीछा करते है तो देखते है। खुदानी बीबी रोज की तरह गाय को चरने के लिए छोड़कर खेलने चली जाती है। और गाय एक खास जगह पर अपने आप अपना दूध देने लगती है। यह सारी घटना को देखकर घरवाले को लगता है की उस जगह पर जरूर कुछ है जिस कारण से गाय रोज अपना दूध वही गिरा देती है। उसी समय स्थानीय लोगो द्वारा वहा पर एक कुएं के लिए खुदाई की जाती है। खुदाई के दौरान वहां एक शिवलिंग निकलता है।

 कुदाल का एक प्रहार शिवलिंग पर भी हो जाता है। तभी स्थानीय लोगो द्वारा इस शिवलिंग को वही पर स्थापित कर दिया जाता है। इधर खुदनी बीबी के घरवाले खुदनी के स्वप्न वाली बाते सब को बताते है और सब अपने अपने घर चले जाते है। रात को फिर से खुदनी के स्वप्न में महाकाल आते है और उनसे पूछते है। की उसकी क्या इच्छा है? तब खुदनी बीबी कहती है की वह महाकाल के शरण में आना चाहती है और उसके  मरने के बाद उसके शरीर को उस शिवलिंग के पास ही दफन किया जाय जहां गाय दूध दिया करती थी। अगले दिन खुदनी बीबी यह बात सभी को बताती है। और उसके शरीर से उसके प्राण निकल जाते है। इस घटना के बाद खुदनी बीबी का मजार भी शिवलिंग के पास स्थापित कर दिया जाता है और उसी दिन से महाकाल के साथ साथ उस मजार की भी पूजा अर्चना होने लगती है।

इस मंदिर को लेकर विख्यात कहानी उपरोक्त वर्णित है। यह कहानी वहां के स्थानीय लोगो द्वारा बताई गई है।

माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने इस सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बाबा खुदनेश्वर धाम मंदिर आकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन किए थे और इसे पर्यटन स्थल बनाने की बात भी की थी।


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